Sunday, 27 September 2009

खुद ही रोने आयेंगे...


"लाश पर अपनी,
 हम खुद ही कफ़न बिछायेंगे,
जब रोने वाला होगा न कोई,
तो खुद ही रोने आयेंगे..."

11 comments:

  1. वाह-वाह! बहुत अच्छा!

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  2. चिट्ठा जगत में आपका हार्दिक स्वागत है. लिखते रहिये. शुभकामनाएं.

    ---
    लेखक / लेखिका के रूप में ज्वाइन [उल्टा तीर] - होने वाली एक क्रान्ति!

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  3. Bahut Barhia... aapka swagat hai...

    thanx
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  4. बहुत ... बहुत .. बहुत अच्छा लिखा है
    हिन्दी चिठ्ठा विश्व में स्वागत है
    टेम्पलेट अच्छा चुना है. थोडा टूल्स लगाकर सजा ले .
    कृपया वर्ड वेरिफ़िकेशन हटा दें .(हटाने के लिये देखे http://www.lifeplan.co.nr)
    कृपया मेरा भी ब्लाग देखे और टिप्पणी दे
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  5. पोपुलर इंडिया जी,अमित सागर जी, हितेन्दर कुमार जी और मनोज कुमार जी.. आप सभी लोगों का मेरे ब्लॉग पर आने क लिए तथा अपने विचार देने का शुक्रिया....

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  6. jab rone vala n hoga koi....Bahut achcha.

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  7. ब्लॉग जगत में आपका स्वागत है

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  8. ---- चुटकी-----

    कौन ! महात्मा गाँधी
    हम नहीं जानते हैं,
    हम तो राहुल गाँधी को
    अपना आदर्श मानते हैं,
    एक यही गाँधी हमें
    सत्ता का स्वाद चखाएगा,
    महात्मा तो बुत है,
    तस्वीर है,विचार है,
    यूँ ही
    पड़ा,खड़ा सड़ जाएगा।

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  9. आपका स्वागत है
    आपको पढ़कर अच्छा लगा
    शुभकामनाएं


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  10. अच्छा लिखते है आप . सुन्दर प्रयास
    बधाई

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