मेरी शायरी..
खुली हुई किताब हूँ मैं, ज़िन्दगी के मेज पर पड़ी.. जब चाहो पढ़ सकते हो मुझे, सिर्फ प्यार की नज़र से...
Wednesday, 30 September 2009
दिल की....
दिल की बात को, होंठों पर लाने से क्या मिला ?
कहना ही क्या, मुफ्त में 'बदनाम' हो गए हैं...
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